लोकेशन – द्वारका/रिपोर्ट – मारीदास :- योग सीड ट्रस्ट का छठा स्थापना दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन द्वारका स्थित गोलोक धाम डीडीए पार्क में श्रद्धा, उत्साह और समर्पण के साथ सम्पन्न हुआ। इस आयोजन का नेतृत्व योग सीड ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी श्याम चैतन्य जी के दिव्य मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत इस्कॉन द्वारका की टीम द्वारा श्रीकृष्ण संकीर्तन से हुई, जिससे वातावरण भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भर गया। दीप प्रज्वलन का शुभारंभ मुख्य अतिथियों, योग सीड के ट्रस्टियों और विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिससे यह क्षण अत्यंत भावपूर्ण बन गया। इस वर्ष की एक विशेष पहल के तहत योग सीड ट्रस्ट ने दिव्यांग बच्चों, विशेषकर नेत्रहीनों को इस आयोजन में शामिल कर उनके लिए योग और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के द्वार खोले। इन बच्चों की सहभागिता ने योग सीड की समावेशी सोच को साकार किया योग के प्रकाश को समाज के हर कोने तक पहुंचाना। बच्चों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और कार्यक्रम में जीवंतता भर दी। कार्यक्रम के दौरान योग का शुभारंभ नामक विशेष योग सीड पुस्तिका का विमोचन भी किया गया, जिसे मंच पर उपस्थित विशिष्ट अतिथियों द्वारा जारी किया गया। योग दिवस की ऊर्जा और गर्मी के बीच, सभी प्रतिभागियों को ठंडाई और केले वितरित किए गए, जिससे तन-मन को ताजगी मिली। साथ ही स्मृति स्वरूप उपहार भी वितरित किए गए, जो प्रतिभागियों के चेहरों पर मुस्कान और दिलों में यादें छोड़ गए। योग सीड ट्रस्ट की शक्ति उसके निःस्वार्थ सेवा करने वाले समर्पित सदस्यों में निहित है। इस कार्यक्रम में द्वारका रेजिडेंट फेडरेशन के उपाध्यक्ष निधि गुप्ता जी, मीना नंदवानी, बानी, परमजीत, नलिनी, सुरेखा शर्मा, हेमा, दया जी, पूर्व ट्रस्टी वैश्नवी जी, अरविंद जी, आर. के. शर्मा, हरीश जी, के.के. खट्टर जी, महेश पंत, सुभाष नंदवानी, अमित जी, पुष्पा जी, पंकज जी, वंदना जी, अनीता भारद्वाज मेहरा, शीला मेहरा जी व ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य एवं ट्रस्टीगण उपस्थित रहे। इन सभी का योगदान योग, सेवा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में अविस्मरणीय है। कार्यक्रम का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि योग सीड का उद्देश्य योग, सेवा और एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है, ताकि एक स्वस्थ, सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सके।
