भारत में व्यवसाय शुरू करना या उसे सफलतापूर्वक चलाना केवल अच्छे आइडिया से नहीं, बल्कि सही कानूनी दस्तावेज़ों से भी जुड़ा होता है। व्यवसाय के प्रकार के अनुसार ये दस्तावेज़ बदल सकते हैं, लेकिन इनका उद्देश्य एक ही है—कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करना और भविष्य के जोखिमों से बचाव।
1. कंपनी गठन से जुड़े दस्तावेज़
सबसे पहले आते हैं कंपनी के गठन के दस्तावेज़:
समझौता ज्ञापन (MoA): इसमें कंपनी का नाम, उद्देश्य, पूंजी संरचना और दायित्व तय किए जाते हैं।
एसोसिएशन के लेख (AoA): कंपनी के आंतरिक नियम, शेयर वितरण, निदेशकों की नियुक्ति और निर्णय प्रक्रिया का विवरण होता है।
निगमन प्रमाणपत्र (Certificate of Incorporation): यह प्रमाणपत्र MCA द्वारा जारी किया जाता है, जो कंपनी को एक कानूनी पहचान देता है।
2. पहचान और पंजीकरण दस्तावेज़
निदेशक पहचान संख्या (DIN): हर निदेशक के लिए अनिवार्य, DIR-3 फॉर्म से प्राप्त होती है।
कंपनी PAN कार्ड: टैक्स से जुड़े सभी लेन-देन के लिए आवश्यक।
GSTIN: यदि टर्नओवर 20 से 40 लाख रुपये से अधिक है, तो GST पंजीकरण अनिवार्य होता है।
3. संरक्षण और अनुबंध दस्तावेज़
ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन: ब्रांड नाम और लोगो की सुरक्षा के लिए।
शेयरहोल्डर एग्रीमेंट: इक्विटी डाइल्यूशन, अधिकारों और विवाद समाधान के लिए।
नॉन-डिस्क्लोज़र एग्रीमेंट (NDA): गोपनीय जानकारी और दस्तावेज़ों की सुरक्षा के लिए।
4. अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़
कर्मचारी अनुबंध/ऑफर लेटर: सेवा शर्तें, IP स्वामित्व और कंपनी नीतियों को स्पष्ट करता है।
व्यवसाय लाइसेंस या NOC: उद्योग के अनुसार, जैसे FSSAI लाइसेंस या दुकान एवं स्थापना लाइसेंस।
व्यवसाय प्रारंभ प्रमाणपत्र (INC-20A): कुछ कंपनियों के लिए ROC से अनिवार्य।
इन सभी दस्तावेज़ों को MCA पोर्टल या संबंधित विभागों से प्राप्त किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात—अपनी कंपनी में एक अनुभवी कानूनी सलाहकार अवश्य नियुक्त करें, जो आपको आने वाले कानूनी जोखिमों से सुरक्षित रख सके।
किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता के लिए संपर्क करें:
एडवोकेट रंजना माहेश्वरी
📞 9911473894