कौशल, शिक्षा और युवा सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता के साथ डीएसईयू ने मनाया 7वाँ स्थापना दिवस

नई दिल्ली, 8 अक्तूबर, 2026: दिल्ली स्किल एंड एंटरप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (DSEU) ने अपना 7वां स्थापना दिवस भरतमुनि ऑडिटोरियम, CCRT, सेक्टर 7, द्वारका में मनाया, जिसमें विश्वविद्यालय का नेतृत्व, संकाय, छात्र तथा शैक्षणिक, औद्योगिक एवं सामाजिक क्षेत्रों के गणमान्य अतिथि एक साथ उपस्थित हुए। इस उत्सव ने DSEU के सात वर्षों की यात्रा तथा कौशलोन्मुखी शिक्षा, उद्यमिता, व्यावहारिक अधिगम एवं छात्र विकास पर उसके निरंतर बल को दर्शाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता DSEU के कुलपति ऑनरेरी कर्नल प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार नगावत ने की। जिंदल मेकटेक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, वरिष्ठ उद्योगपति, सामाजिक नेता एवं परोपकारी श्री पवन जिंदल मुख्य अतिथि थे, जबकि ANRF नेशनल साइंस चेयर एवं आईआईटी दिल्ली के एमेरिटस प्रोफेसर प्रो. भीम सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. आभा जैन विशेष अतिथि थीं। इनके अतिरिक्त DSEU के रजिस्ट्रार शैलेंद्र सिंह परिहार, IAS; प्रो. अजय सिंगोली; जनसंपर्क निदेशक एवं वित्त नियंत्रक डॉ. पंकज लाठर; शैक्षणिक निदेशक प्रो. कामना सचदेवा सहित अनेक लोग उपस्थित थे।
औपचारिक कार्यवाही की शुरुआत गणमान्य अतिथियों के स्वागत तथा पुष्प-गुच्छ व अंगवस्त्र से उनके सम्मान के साथ हुई।
प्रो. अजय सिंगोली ने अतिथियों का स्वागत किया और युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने में कौशल विकास, उद्यमिता और व्यावहारिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। पारंपरिक रोज़गार से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा, “भारत के युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाइए।”
सभा को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार नगावत ने शिक्षा, कौशल, रचनात्मकता और उद्यमिता को एक साथ जोड़ने के DSEU के विज़न पर बात की। उन्होंने ज़ोर दिया कि शिक्षा केवल रोज़गार तक न ले जाए, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, पहचान और समाज में सार्थक स्थान बनाने में भी सहायक हो। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति, उद्योग से जुड़ाव, महिला केंद्रित पहलों तथा अल्पकालिक कौशल एवं प्रमाणन कार्यक्रमों का उल्लेख किया और छात्रों को DSEU का दूत बताया। ज्ञान, कौशल और राष्ट्रीय विकास को जोड़ते हुए उन्होंने कहा, “ज्ञान से कौशल बनता है, कौशल से अवसर बनते हैं, और अवसर से राष्ट्र सशक्त होता है।”
विशिष्ट अतिथि प्रो. भीम सिंह ने DSEU को स्थापना दिवस की बधाई दी और युवाओं के लिए अवसर बनाने में प्रौद्योगिकी, शिक्षा और उद्यमिता की भूमिका पर बात की। प्रौद्योगिकी और नवाचार के अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने छात्रों को अपने ज्ञान का व्यावहारिक चुनौतियों में उपयोग करने और शिक्षा को सशक्तिकरण का साधन बनाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि पवन जिंदल ने औपचारिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल, आत्मविश्वास और अनुभव को जोड़ने के महत्व पर बल दिया। अपनी स्वयं की यात्रा के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पृष्ठभूमि या पारंपरिक शैक्षणिक सीमाओं को उसकी आकांक्षाओं का बाधक नहीं बनना चाहिए। उन्होंने एन. आर. नारायण मूर्ति, ओ. पी. जिंदल, धीरूभाई अंबानी, MDH के संस्थापक, बाबा रामदेव और लाल बहादुर शास्त्री जैसी हस्तियों की यात्राओं का उल्लेख दृढ़ संकल्प, पहल और अवसर पहचानने की क्षमता के उदाहरण के रूप में किया।
उदीयमान उद्यमियों के लिए श्री जिंदल ने तीन मूल बातों — कॉस्टिंग (लागत), क्वालिटी (गुणवत्ता) और कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) — पर बल दिया और प्रतिस्पर्धी लागत, गुणवत्ता बनाए रखने और वादों को पूरा करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने पानीपत स्थित एक कौशल विकास केंद्र का उदाहरण देकर बताया कि प्रशिक्षण कैसे रोज़गार और उद्यमिता के अवसरों में बदल सकता है। उनके संबोधन में बार-बार व्यावहारिक क्षमताएं विकसित करने और नौकरी मांगने वालों से अवसर सृजन करने वाला बनने पर ज़ोर रहा।
DSEU के रजिस्ट्रार शैलेंद्र सिंह परिहार, IAS ने इस युवा विश्वविद्यालय की क्षमता को रेखांकित किया और निरंतर सुधार तथा ऊँची आकांक्षाओं के लिए प्रोत्साहित किया। इस संदर्भ में छोटे बीज और बड़े वृक्ष की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि सार्थक उपलब्धियाँ अक्सर छोटे लेकिन दृढ़ कदमों से शुरू होती हैं।
इसके बाद स्मृति चिन्ह और सम्मान समारोह हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट किए गए, जबकि अन्य प्रमुख गणमान्य व स्थापना दिवस आयोजन समिति से जुड़े सदस्यों का भी सम्मान किया गया।
औपचारिक सत्र का समापन DSEU द्वारका कैंपस के कैंपस निदेशक डॉ. नारायण अग्रवाल द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने गणमान्य अतिथियों, विश्वविद्यालय नेतृत्व, संकाय, कर्मचारियों, छात्रों और आयोजन दल का आभार व्यक्त किया और समारोह के सफल आयोजन में योगदान देने वाले प्रयासों की सराहना की।
औपचारिक सत्र के बाद स्टूडेंट कैंपस एंबेसडर्स — मीडिया एवं PR का परिचय कराया गया और उन्हें मंच पर आमंत्रित कर औपचारिक रूप से स्वागत किया गया और उन्हें जॉइनिंग सर्टिफिकेट दिए गए, जो कैंपस एंबेसडर कार्यक्रम से उनके औपचारिक जुड़ाव का प्रतीक है।
इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ, जो स्थापना दिवस का एक प्रमुख आकर्षण रहा। छात्रों ने राजस्थानी, हरियाणवी और अन्य क्षेत्रीय परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें संगीत, नृत्य, परिधान और कोरियोग्राफी के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया गया। कार्यक्रम में “इक ज़िंदगी मेरी सो ख़्वाहिशा इक-इक मे पूरी करा” गीत पर आधारित एक पढ़ाई-संबंधित प्रस्तुति भी हुई, जिसने छात्रों के लिए आकांक्षा और प्रेरणा का संदेश दिया।
दर्शकों की ओर से प्रस्तुतियों को उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली, जो DSEU के छात्रों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक भागीदारी को दर्शाती थी। इस कार्यक्रम ने विभिन्न क्षेत्रीय परंपराओं को एक साझा मंच पर लाकर स्थापना दिवस समारोह में छात्र-केंद्रित आयाम को और मजबूत किया।
उत्सव का समापन भरतमुनि ऑडिटोरियम में DSEU के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन से हुआ, जिसमें डॉ. कीर्ति काले, आलोक अविरल, नमिता नमन, प्रखर मालवीय “कन्हा”, डॉ. पंकज श्याम लाठर और कर्नल संजय चतुर्वेदी ने काव्य पाठ किया।
7वां स्थापना दिवस समारोह DSEU की संस्थागत यात्रा, कौशल एवं उद्यमिता पर उसके फोकस और छात्रों की रचनात्मकता व उत्साह का संगम रहा, जिसने कौशल-आधारित शिक्षा, व्यावहारिक अधिगम और युवाओं को कार्य के बदलते विश्व के लिए तैयार करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।
