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फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में हुआ, रीढ़ की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे, चार मरीजों का सफल उपचार |

17 अक्टूबर 2026
फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में हुआ, रीढ़ की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे, चार मरीजों का सफल उपचार |

ग्रेटर नोएडा, 16 अक्टूबर 2026।* फोर्टिस अस्पताल, ग्रेटर नोएडा में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर बीमारियों से पीड़ित चार मरीजों का सफल उपचार किया गया। अस्पताल के विशेषज्ञों ने आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और बहुविषयक चिकित्सा देखभाल की मदद से स्कोलियोसिस, गर्दन की डिस्क खिसकने और कमर की नसों पर दबाव जैसी जटिल समस्याओं का इलाज किया। अस्पताल के अनुसार, उपचार के बाद मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने दोबारा चलना-फिरना शुरू कर दिया।

अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, उपचारित मरीजों की उम्र 16 से 44 वर्ष के बीच थी। इनमें कुशीनगर के 20 वर्षीय सिद्धार्थ सिंह, नोएडा की 16 वर्षीय राधिका चंदेला, दिल्ली के 44 वर्षीय जतिन त्यागी और आगरा के 30 वर्षीय गौतम शामिल हैं। मरीजों की बीमारी और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग सर्जिकल तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।

*72 डिग्री तक मुड़ी रीढ़ की हड्डी का उपचार*

सिद्धार्थ सिंह और राधिका चंदेला स्कोलियोसिस से पीड़ित थे। सिद्धार्थ की रीढ़ का टेढ़ापन 72 डिग्री तक पहुंच गया था, जबकि राधिका को रीढ़ की विकृति के कारण पीठ के निचले हिस्से में काफी दर्द हो रहा था। डॉक्टरों ने जनरल एनेस्थीसिया के तहत सर्जरी कर विशेष रॉड और स्क्रू की मदद से रीढ़ को सही स्थिति में लाने और स्थिरता प्रदान करने का प्रयास किया। अस्पताल के अनुसार, ऑपरेशन के बाद दोनों मरीजों ने चलना शुरू कर दिया और उनकी रिकवरी में सुधार देखा गया।

*गर्दन की डिस्क खिसकने से हाथ में था दर्द और सुन्नपन*

दिल्ली के 44 वर्षीय जतिन त्यागी की गर्दन में डिस्क खिसकने के कारण नसों पर दबाव पड़ रहा था। इससे उनके बाएं हाथ में तेज दर्द और सुन्नपन की समस्या थी। डॉक्टरों ने एंटीरियर सर्वाइकल डिस्केक्टॉमी एंड फ्यूजन (ACDF) तकनीक से सर्जरी की। इस प्रक्रिया में प्रभावित डिस्क को हटाकर नसों पर दबाव कम किया गया और रीढ़ को स्थिरता देने के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। अस्पताल के मुताबिक, सर्जरी के बाद उनके दर्द और सुन्नपन में सुधार हुआ तथा उन्होंने अगले दिन से चलना शुरू कर दिया।

*कमर की नसों पर दबाव के कारण चलना था मुश्किल*

आगरा के 30 वर्षीय गौतम को कमर के निचले हिस्से में तेज दर्द के साथ बाएं पैर में दर्द, सुन्नपन और झनझनाहट की शिकायत थी। परेशानी के कारण वह पांच मिनट से अधिक नहीं चल पा रहे थे। डॉक्टरों ने छोटे चीरे के माध्यम से एंडोस्कोपिक डिस्केक्टॉमी की। हाई-डेफिनिशन एंडोस्कोप की मदद से नस पर दबाव डाल रहे डिस्क के हिस्से को हटाया गया। अस्पताल के अनुसार, उपचार के बाद गौतम की स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने छुट्टी मिलने से पहले ही चलना शुरू कर दिया।

*समय पर पहचान और आधुनिक तकनीक महत्वपूर्ण*

फोर्टिस अस्पताल, ग्रेटर नोएडा के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के निदेशक डॉ. हिमांशु त्यागी ने कहा कि रीढ़ की बीमारियां व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता, स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। समय पर बीमारी की पहचान, मरीज की स्थिति के अनुरूप सर्जिकल तकनीक का चयन और विशेषज्ञों की देखरेख बेहतर उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के माध्यम से कम से कम चीरे में उपचार और ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल पर ध्यान दिया जाता है, जिससे रिकवरी में मदद मिल सकती है।

अस्पताल की फैसिलिटी निदेशक बिंदु शर्मा ने कहा कि चारों मरीजों के उपचार में सर्जरी, नर्सिंग और विभिन्न चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने समन्वय के साथ काम किया। अस्पताल मरीजों और उनके परिवारों को उपचार से लेकर रिकवरी तक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

अस्पताल के अनुसार, इन मामलों में सामने आए उपचार परिणाम रीढ़ की जटिल बीमारियों में समय पर निदान, मरीज की जरूरत के अनुरूप सर्जरी और विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल के महत्व को रेखांकित करते हैं।

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